Traditional Haryana emotional Sad voice music
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Traditional Haryana emotional Sad voice music
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Prompt:
सूनी पड़ी वो डगरिया, और सूना पड़ा वो द्वार, छोड़ के अपणा देस रे भाई, हम हो गए लाचार। रोवे है वो नीम का पेड़, जहाँ झूला करते थे, याद आवें वो दिन पुराने, जब खिल के हंसते थे। हो... बेगाणी होगी माटी, और बेगाणा हो गया प्यार। (अंतरा 1) बाबू की वो लाठी देखो, कोने में धरी सै, माँ की आँखों में आज भी, बस यादें भरी सै। वो खेत-खलिहान पुकारें, जहाँ पसीना बहाया था, वो यार-दोस्त भी छूट गए, जिनसे जी लगाया था। इब तो बस ये चार दीवारें, और तनहाई का पहरा, जख्म तो बहुत लगे हैं, पर यो दर्द बहुत है गहरा। (अंतरा 2) शहर की इस भीड़ में भाई, हर चेहरा अणजाणा, किते खो गया वो सुथरा, अपना पुराना ठिकाना। चूल्हे की वो आग बुझ गई, ठंडी हो गई रोटी, किस्मत की इस दौड़ में, खुशियाँ पड़ गई छोटी। जी करै है उड़ के आऊं, फिर से उस गलियारे में, पर कैद हो गया हूँ मैं, दुनिया के इस अंधियारे में। (समाप्ति) माफ करिये ओ मेरी माटी, मैं फर्ज निभा ना पाया, तेरी गोद को छोड़ के, बस पैसा ही कमाया। हो... बस पैसा ही कमाया।